Tuesday, April 6, 2010

नक्सलियों की काली करतूत




छत्तीसगढ़ ये वो राज्य है जहां से जून 2009 में ऑपरेशन ग्रीन हंट की शुरूआत हुई थी...अब ये ग्रीन हंट है क्या ये वो ऑपरेशन है जिसे नक्सलियों के खिलाफ सरकार ने चलाया है..जिसका मकसद नक्लियों को जड़ से मिटा देना है....देश में बड़ रहे इस नक्सवाद को खत्म होने में कितना समय लगेगा ये कहना मुश्किल है...गृहमंत्री पी.चिदमंबरम ने बयान से बौखलाए नक्सली इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते है इसका अंदाज़ा किसी के ख्वाबों-ख्याल में भी नहीं था..6 अप्रैल 2010 ये वो दिन है जो सारे देश में खास कर छत्तीसगढ़ में काले दिन के रूप में याद किया जाएगा...इस दिन एक साथ देश ने 76 जवानों को खो दिया,इस दिन कई बच्चे अनाथ हो गए,कई मांओं से उनके बेटे छिन गए,कई पत्नियों ने अपना सुहाग खो दिया...बदले में इन जवानों को मिली सिर्फ शहादत ...नक्सली आखिर इतने उग्र क्यों हो गए...इसका कारण सरकार के पास नहीं है ..आए दिन हमले होते रहते है सारी तैयारियां धरी का धरी रह जाती है..हमलमा करके ये लोग कहां गयाब हो जाते हैं..इसका पता भी नहीं चलता...अभी कुछ दिन पहले ही मेरी मुलाकात ट्रेन में कुछ सीआरपीफ के जवानों से हुई जो दंतेवाड़ा में पोस्टेड थे...बात जब निकली नकस्लियों की तो उनका कहना था..हमारे पास ना तो इतने अच्छे..इतने आधुनिक हथियार है,ना ही जंगलों की कोई जानकारी,जंगल इतने घने होते है की एक बार अगर अंदर चले गए तो रास्ता भटक जाए...हमारे पास जंगलों की कोई नोलेज नहीं कहां..नक्सली धुपे हो सकते हैं...यहां तक की गांव के लोगों से भी बात करके कुछ जानकारी नहीं ले सकते पता नहीं कौन आम आदमी है और कौन नक्सली..ये बाते सुनकर वाकीय यहीं लगा...एक तो घर से दूर उपर से सर पर कफन बांधे ये जवान आखिर क्या करें ,कैसे सबसे नपटे ..औऱ कल ही ये इतनी बड़ी वारदात हो गई...उस जवान की बातें लगातार मुझे याद आ रही थी...सरकार क्या करती है कुछ खाम नहीं...इतने जवान अब तक मारे गए है...क्या कोई अंदाज़ा है..अकेले छत्तीसगढ़ में ही..14-14 मार्च 06 रानीबोदली में पुलिस कैपं पर हमला हुआ 55 जवान शहीद,9 जुलाई 08 दंतेवाड़ा में पीछा कर रही पुलिस पार्टी पर हमला 22 जवान शहीद,09 मई 09 धमतरी के रिसगांव में सर्चिंग से लौट रहे जवानों परहमला 13 शहीद,11 जुलाई 09 राजनांदगांव में एंबुश लगाकर हमला एसपी विनोद कुमार चौबे समेत 29 शहीद औऱ 6 अप्रैल 2010 को 76 जवान शहीद...आखिर इन नक्सलियों को आततंकवादी क्या घोषित नहीं किया जाता....कब तक ये बेगुनाहों की जान यू ही लेते रहेंगे...ये तो सिर्फ जवानों की ही बात है ,नकस्ली रोज़ एक-दो ,एक -दो आम लोगों की जान तो लेते ही रहते हैं....और बात जब आती है मुआवज़े की तो अभी तक कई शहीद जवान के परिवार ऐसे हैं जिनका बोटा तो छिन ही गया..अब घर चलाने के लिए सरकार की तरफ से मदद के इंतज़ार में हैं...अब इतनी बड़ी वारदात के बाद भी हमारी सरकार सिर्फ बैठके ही कर रही है...क्या सरकार की निंद कब जगेगी..क्या ऐसे ही हमारे जवान शहीद होते रहेगे..अब तो कुछ कड़े रूख अख्तियार करने के जरूरत है...इनको रोकना बेहद लाबूदा मुद्दा है....

No comments:

Post a Comment