रात के संग है चांदनी ,दिन की बात निराली
तोरे संग बैठे-बैठे,दिल की बात कह डाली ।
रात के संग है चांदनी....
बात करू मोहे लाज भी आवे,ना करू मर जाऊ
आजा अब तो साजन मोरे,बाहो में भर जाऊ
रात के संग है चांदनी.....
हर पल करू तोरा इंतजार में,निंदों में जग जाऊ
एक झलक तोहे देखन को,बेकरार हो जाऊ
रात के संग है चांदनी......
हाय ये जलवे तोरे सजना,दिवाना कर जाए
अब तो मोरे नयनों में ,झलक तोरी नजर आए
रात के संग है चांदनी........
Saturday, October 15, 2011
Friday, July 22, 2011
कुछ खास
पुराने दोस्तों की टोली मिली, अब वो बातें ना हुई
सच कड़वा है, बड़े होने पर बचपन छूट जाता है
कुछ बहुत है खास, इस पुराने लिबास में
फटा है लेकिन, पहंनू तो आराम बहुत आता है
बिना कुछ कहे, वो चला गया दूर मुझसे
ये सही है, जिसे जाना हो वो चला जाता है
दरख्त,समंदर,जंगल,दरिया सब सूखने लगे हैं
हरियाली तोहफा है, वरना अकाल पड़ जाता है
खाना खिलाया फकीर, को खुश हो गया
खिदमत करने में, ज़हनों दिल को सुकून आता है
अकेले सफर कर ,रास्ता कठिन है
करीबी आएंगे साथ ज़रूर,गैर कौन साथ निभाता है
सच कड़वा है, बड़े होने पर बचपन छूट जाता है
कुछ बहुत है खास, इस पुराने लिबास में
फटा है लेकिन, पहंनू तो आराम बहुत आता है
बिना कुछ कहे, वो चला गया दूर मुझसे
ये सही है, जिसे जाना हो वो चला जाता है
दरख्त,समंदर,जंगल,दरिया सब सूखने लगे हैं
हरियाली तोहफा है, वरना अकाल पड़ जाता है
खाना खिलाया फकीर, को खुश हो गया
खिदमत करने में, ज़हनों दिल को सुकून आता है
अकेले सफर कर ,रास्ता कठिन है
करीबी आएंगे साथ ज़रूर,गैर कौन साथ निभाता है
'हिन्दुस्तान'
राहुल गांधी की फिसल गई है ज़बान
क्या यही है मेरा खौफज़दा हिन्दुस्तान
नहीं रुकेंगे देस पर ये आतंकी हमले
कांग्रेस के महासचिव का आया है बयान ।
मुंबई ब्लास्ट ने फिर हरे कर दिए हैं ज़्ख्म
कैसे कोई करे आतंकियों की पहचान
कैसे कोई रोके हर दिन होते इन हमलों को
हर शख्स को हमले दे रहें है गहरे निशान ।
अब तो खत्म हो ये खूनी होली
हर नागरिक का है यही अरमान
मज़हब के आड़ में हो रहे हैं झगड़े
कैसे पहुंचाया जाए सौहार्द का पैगाम.....
क्या यही है मेरा खौफज़दा हिन्दुस्तान
नहीं रुकेंगे देस पर ये आतंकी हमले
कांग्रेस के महासचिव का आया है बयान ।
मुंबई ब्लास्ट ने फिर हरे कर दिए हैं ज़्ख्म
कैसे कोई करे आतंकियों की पहचान
कैसे कोई रोके हर दिन होते इन हमलों को
हर शख्स को हमले दे रहें है गहरे निशान ।
अब तो खत्म हो ये खूनी होली
हर नागरिक का है यही अरमान
मज़हब के आड़ में हो रहे हैं झगड़े
कैसे पहुंचाया जाए सौहार्द का पैगाम.....
Friday, July 15, 2011
मेरे अहसास

कैसा ज़माने का ये दस्तूर है
जिसे पाना चाहा वो बहुत दूर है,
दिल को बहलाने की कोशिस की बहुत
तुझे याद करने को दिल मजबूर है ।
तिरे साथ को तरसते हैं दिन-रात हम
तिरे ख्यालों में डूबे रहने में मशगूल हैं
मोहब्बत की खुशबू रहती है हर तरफ
मेरे महबूब की अदायें इतनी खूब हैं।
मेरी राह में आई कितनी ही परेशानियां
मेरे साथ मेरे हमदम हर वख्त तिरा सूरूर है
कुछ तो तिरे दिल में है मेरे लिए जज़्बात
मेरे अहसास अब-तक तिरे यादों में महफूज़ है ।
लाख सितम करले ये ज़माना मुझ पर
साथ रहे तिरा मुझे सब कबूल है
जो भी हो फरमान हो तिरा मेरे लिए
मिले तिरे कुछ लम्हात मुझे मंज़ूर है ।
Thursday, July 14, 2011
बरसात

रिमझिम-रिमझिम आई ये बरसात,
दिल को परेशां कर गई तेरी याद,
भीगा है मेरा तन,महक उठा ये उपवन
कैसे ना जागे अब मेरे जज़्बात
रिमझिम--------------
धरती पर है छाई हरियाली
हर जगह अब दिखे खुशहाली
हर चेहरा लगे है रौशन आज
रिमझिम-रिमझिम आई ये बरसात
--------------------
नाचे है मोर गाए पपिहा
बागों में लगे चिड़ियों का डेरा
कैसा है ये मौसम खास
रिमझिम-रिमझिम आई ये बरसात
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