Friday, July 22, 2011

कुछ खास

पुराने दोस्तों की टोली मिली, अब वो बातें ना हुई
सच कड़वा है, बड़े होने पर बचपन छूट जाता है

कुछ बहुत है खास, इस पुराने लिबास में
फटा है लेकिन, पहंनू तो आराम बहुत आता है

बिना कुछ कहे, वो चला गया दूर मुझसे
ये सही है, जिसे जाना हो वो चला जाता है

दरख्त,समंदर,जंगल,दरिया सब सूखने लगे हैं
हरियाली तोहफा है, वरना अकाल पड़ जाता है

खाना खिलाया फकीर, को खुश हो गया
खिदमत करने में, ज़हनों दिल को सुकून आता है

अकेले सफर कर ,रास्ता कठिन है
करीबी आएंगे साथ ज़रूर,गैर कौन साथ निभाता है

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