Thursday, July 14, 2011

बरसात


रिमझिम-रिमझिम आई ये बरसात,
दिल को परेशां कर गई तेरी याद,
भीगा है मेरा तन,महक उठा ये उपवन
कैसे ना जागे अब मेरे जज़्बात
रिमझिम--------------
धरती पर है छाई हरियाली
हर जगह अब दिखे खुशहाली
हर चेहरा लगे है रौशन आज
रिमझिम-रिमझिम आई ये बरसात
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नाचे है मोर गाए पपिहा
बागों में लगे चिड़ियों का डेरा
कैसा है ये मौसम खास
रिमझिम-रिमझिम आई ये बरसात

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